Thursday, March 16, 2023

Antarman ka shankhnaad



Antarmann ka Shankhnaad / अंतर्मन का शंखनादkavita sangrah

Author Name: Sandeep Savitaprakash Sharma | Format: Paperback | Genre : Poetry Other Details

अंतर्मन का शंखनाद  -काव्य संग्रह


अंतर्मन का शंखनाद (कविता संग्रह) मेरी भावाभिव्यक्ति है। जीवन में जो घटित हुआ, अनुभव किया एवं प्रभावित हुआ, यही मेरी रचनाओं का मूल विषय है।।
कलियुग की भोर ,चलना जारी रख ,पतंग , होंसला रख ,जीने के बहाने , होली फिर आने को हैं ,समुद्रमंथन सा यह जीवन ,उठ-जाग मुसाफिर ,जीवन चक्रव्यूह , हार-दी डेफेट, बहने दो मुज को बेपरवाह ,एक मोहलत -दो पल की , आदि बहुत सी रचनाओं का संकलन आपके हाथों में है जिसे आप तक पहुँचाकर गर्व महसूस कर रहा हूँ। मैं साहित्य की किसी विधा का ज्ञानी न होकर मात्र एक विद्यार्थी हूँ। अंतर मन में विभिन्न विषयों पर जो भाव उत्पन्न हुए, उन अंतर्मन का शंख नाद -पुस्तक में ही कागजों पर उकेरने का प्रयास किया हूँ।
हर एक कविता कुछ कहती है, सुनाती है, कभी साथ चले होंगे - ऐसा अहसास दिलाती है, जोड़ती है, प्रेरणा देती है - कर्त्तव्य पथ पर निडर चलने की, बचपन की यादों को ताजा करती है, चलते चलो-रूको नहीं का पाठ पढ़ाती है, प्रेम को सजीव करती है। अंतर्मन का शंखनाद (कविता संग्रह) आपके जीवन के कितने नजदीक है, इसका निर्णय आप पर छोड़ता हूँ।

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 संदीप सविताप्रकाश शर्मा

संदीप सवितप्रकाश शर्मा

इस पुस्तक के रचयिता संदीप सवितप्रकाश शर्मा राजस्थान के सूरजगढ़ मूल निवासी हैं। जन्म १५ दिसंबर १९७३ को सूरजगढ़ , राजस्थान , मैं हुआ। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड स्पेस साइंसेज में स्नातकोत्तर की डिग्री गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद प्राप्त की है।तदुपरान्त उन्होंने मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर की डिग्री गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद से प्राप्त की है। तदुपरान्त औद्योगिक क्षेत्र की सेवाओं से जुड़कर , मैग्नम ओपस इंटरनेशनल ,कंपनी , अहमदाबाद , के मैनेजमेंट एंड रिसर्च विभाग में लगभग 25 वर्ष से डायरेक्टर पद पर सक्रिय योगदान दे रहे है। इसी अवधि के दौरान एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट अड़ फॉरेन ट्रेड में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, मोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन की उपाधि गुजरात विश्वविद्यालय (अहमदाबाद) एवं स। सवियर्स कॉलेज अहमदाबाद से प्राप्त की है।

संदीप सवितप्रकाश शर्मा की पहली पुष्तक -हैडमास्टरजी -थे मन विथ लिटरेसी मिशन , सं २०१६ में प्रकाशित हुए , एवं अमेज़न पर बेस्ट सेलर की श्रेणी में आती है। लेखक ने अपनी जिंदिगी से शुरुआती ५ वर्ष (बचपन) ही अपने दादा के साथ अपने गांव सूरजगढ़ में बिताये , पर उनका अपने गांव से अस्सम प्रेम उनकी कविताओं में खूब उभर के आता हैं उनकी साहित्य एवं लेखन में स्कूली शिक्षा के आरम्भ से ही गहरी रूचि है। इनकी कविताएं एवं लेख विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। आप पिछले ३८ साल से अहमदाबाद मैं रहते हैं।

संपर्क :
संदीप सवितप्रकाश शर्मा  
ईमेल: sandeepsavitaprakashsharma@gmail.com ;

here are few lines :


सीख-ले
- संदीप  सवितप्रकाश  शर्मा  

कविता : ३१ . सीख  ले - संदीप  सवितप्रकाश  शर्मा 

कविता शीर्षकसीख  ले

 

हवा से चारो और फैलना ,

पहाड़ो से अडिग रहना , सब सहना ;

 

लहरों से  बिछड़ के मिलना ,

नदियों से निरंतर बहते रहना  - सीख ले।

 

गुरु से निस्वार्थ ज्ञान  का दान ,

चेलो से  पढ़ना, जीवन में आगे बढ़ना -सीख ले।

 

बारिस से बेखौफ गिरना ,

पानी से  घुलना-मिलना -सीख ले।

 

फूलो से खिलना ,सदा मुस्कराना ,

खुसबू से  बहना और  बिखरना ;

 

हवाओ  से लहराना , पत्तिओ से सरसराना ,

भंवरो  से खुस  रहना , गुनगुनाना -सीख ले।

 

दीयों से रोशन करनाबाती से खुद जलना  ,

सूरज से आसमान में चमकना , निरंतर जलना ;

 

आकाश से ठहराव , , पानी से बहाव ,

पृथ्वी से सब सहना, कुछ  ना कहना ,

हवा से चलते रहना , ना रुकना -सीख ले।

 

अग्नि से से जलना , पावन औरो  को करना ,

वायु से प्राण देना , जीवन को।

 

त्याग  और सत्संग  , संत से ,

चींटियों से  संगर्ष जीवन का करना ,

संगीत मनभावन  बंसरी से , कंठ से  गायन  -सीख ले।

योद्धा से निरंतर लड़ना ,

देशसेवा  में तत्पर  रहना ,

 

कलम से सीख चुपचाप चलना  सब कहना ,

शियाही से सूंदर लिखावट  करना ,

कागज़ से शब्दों को पिरोना ,

पुस्तक से संग एक में बांधना -सीख ले।

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